Saturday, 11 October 2014

ये लफ्ज नहीं ,
दस्तक है  हमारे आने कि ,
अब मिटा  या  भुना ,
ये तेरी  मर्जी 

Monday, 25 August 2014

हताश मन   क्यों  झुंझलाता  है
अंतरिक्ष की तरह अनंत परिद्रश्य रख
साला अन्त  में सब सही हो ही जाता है 

Friday, 20 June 2014

दरकिनार हर चीज़ का हल नहीं
साक्षात्कार बिना अच्छा कल नहीं 

Sunday, 11 May 2014

पात्र उसके  समझना कठिन है 
हर शास्त्र  में उसकी कहिन है 
माँ शब्द हीं अनंत है 
मेरे हर अंश का आदि -अंत  है