बुढा पेड़
बरस इस बार कुछ कम सर्द था
मेरे आस पास फैले
सरसों के झाड मे इस बात का दर्द था
के कमज़ोर पसली वाला अधेड़
फिर लड़ेगा इस बात को लेकर
कि फिर क्यों ना फूटा पीला ,इतना पी कर !
हंगामे की इस घडी मे
नज़र पड़ी बीच कच्ची सड़क पर
धूल भरा गुब्बारा तेज़ी से बेधड़क बढ़ रहा मेरे पर
संगीत और चहक के साथ वो रुक गया
मेरे मोड़ पर अपनी कार के साथ
केदार १० बरस के बाद
फिर बूढ़े पेड़ के पास !
क्यों चरम झड़ गये तेरे पत्ते
कहा