Sunday, 31 January 2016

बुढा  पेड़ 


बरस इस  बार कुछ कम सर्द था 
मेरे आस पास फैले 
सरसों के झाड मे इस बात का दर्द  था 
के  कमज़ोर  पसली  वाला  अधेड़ 
फिर लड़ेगा इस बात को लेकर 
कि  फिर क्यों ना फूटा  पीला ,इतना पी कर !
हंगामे की इस  घडी मे 
नज़र पड़ी बीच कच्ची  सड़क पर 
धूल भरा गुब्बारा तेज़ी से बेधड़क बढ़ रहा मेरे पर 
संगीत और चहक के साथ वो रुक गया 
मेरे मोड़ पर अपनी कार के साथ 
केदार १० बरस के बाद
फिर बूढ़े पेड़ के पास !
क्यों चरम झड़ गये तेरे पत्ते 
कहा   






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