I am telling you a poem which describes a incident of my friend Pintoo,who proposed a girl she liked or loved..
उस दिन आकाश का रंग कुछ कम नीला था,
शायद काले बादल से जो ढाका था,
बादल भी कुछ कम गीला था,
प्यार के इस पल मई सब कुछ फीका था,
बिन बरसात के मै कुछ ऐसा भीगा था,
के मुझे आने वाला काल न दिखा था,
हाँ काल ही तो था वो,
शंका का द्योतक मां ने उस रोज़ छीका था,
पाकर ख़त उसका मेरी खुशी का कोई ठिकाना न था,
ख़त मै उसने मुझे थडी पर चाय पर बुलाया था,
थडी..? थडी सोचकर मन मै संकोच आया था,
पर ख़त पर बाकि चपल बातों से मन गुदगुदाया था,
क्या बताऊ उस रोज़ उस जालिम क खातिर कितना मै सजा था,
जैसे किसी बादशाह का राजतिलक होने वाला था,
मैंने उसका का इच्छीत नीला शर्ट और लाल पैंट पहना था,
अपना हैण्डसम बेटा देख माँ ने माथे पर कला टीका लगाया था,
उस रोज़ बदहाल स्कूटर का बी इम्तिहान होने वाला था,
आखिर उसे अपने पिछले सीट का हमराही मिलने वाला था,
पहुँच थडी मैंने अपना रोब जमाया था,
एक सिगरेट और एक स्पेशल चाय मंगवाया था,
सिगरेट फूंकते अपने गेट अप को देख सुलतान मिर्जा समझा था,
पर सुलतान की इतनी फजीहत होगी ये मैंने न सोचा था,
थोड़ी देर मै मेरा प्यार आने वाला था,
गुलाबी सुट मै वो स्कूटी पर बैठ आया था,
स्कूटी पर बैठ वो बिलकुल प्रीटी जिंटा लग रहा था,
पर मुस्कुराने की बजाये वो आंदोलित नज़र आ रहा था,
स्टैंड पर खड़ी कर स्कूटी उसने मुझे खूब सुनाया था,
मेरा दिया गुलाब जालिम ने गाय को खिलाया था,
बिना सोचे समझे उसने न जाने क्या क्या कहा था,
नालायक,बुधु और अंग्रेज़ी मै जाने क्या क्या सुनाया था,
पर उसके शब्द बाण मुझे न महसूस हुआ था,
मै तो उसको खुदा की बक्शी कुदरत को देख रहा था,
ना करना मुझसे बात अब, वो कह कर चला गया था,
अब थडी पर गाय और मै ही रह गया था,
खुदा कसम उस रात मै बहुत रोया था,
न करूँगा बात ,मन ये atitude मै बोला था,
सुबह होने पर मै वो ही दिल फैंक आशिक था,
पर दूध का जला अब छांछ भी फूँक फूँक के पी रहा था,
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